Motivational story - थकना मना है "Tired of being forbidden"

 आज मैं आपको एक कहानी सुनाने जा रहा हूं इस कहानी का नाम है !" थकना मना है"





एक समय की बात है गौतम बुध और उसके शिष्य दोनों दूसरे गांव में प्रवचन देने जा रहे थे ! काफी दूर चलने के बाद गौतम बुद्ध और उसके शिष्य थक चुके थे ! गौतम बुध का उम्र भी ज्यादा हो चुकी थी इसलिए वह भी काफी थक गए थे ! चलते चलते उनके शिष्य ने उनसे कहा गुरुजी हम लोग काफी थक चुके हैं ,चला नहीं जा रहा है ! 



गौतम बुद्ध ने जवाब दिया हां ,थक चुके हैं लेकिन हम लोग जल्दी पहुंच जाएंगे चलते रहो ! फिर कुछ दूर चलने के बाद जब शिष्य काफी थक गया तो उसने फिर कहा गुरु जी एक काम करते हैं किसी से पूछ लेते हैं कि गांव कितनी दूर है ! 



गौतम बुद्ध ने शिष्य से कहा ठीक है पूछ लो , तो शिष्य ने जब इधर उधर देखा तो वहीं पास में एक खेत में एक आदमी काम कर रहा था ! उस आदमी से शिष्य ने गांव कितनी दूर है पूछा ! तो उस आदमी ने जवाब दिया बस नजदीकी है ज्यादा दूर नहीं है लगभग 2 किलोमीटर होंगे !अब आप पहुंच ही चुके हैं बस चलते रहिए जल्दी पहुंच जाएंगे ! इस बात को सुनकर गौतम बुद्ध ने उस आदमी को देखा और मुस्कुरा दिए ! उस आदमी ने भी गौतम बुद्ध को देखकर मुस्कुरा दिया !


शिष्य ने कहा कि गुरु जी अब तो कुछ ही दूर है गांव चलिए चलते हैं और फिर वह दोनों चल पड़े ! फिर लगभग दो किलोमीटर चलने के बाद जब गांव नहीं आया तो शिष्य ने फिर गुरु जी से कहा जी गुरु जी अभी तक गांव नहीं आया पता नहीं कितनी दूर है , मैं काफी थक चुका हूं !


गुरुजी ने कहा कि अब बस पहुंचने वाले हैं ! गुरुजी की बात सुनकर शिष्य फिर से चल पड़ा और लगभग फिर से 2 किलोमीटर चलने के बाद काफी थक चुका था और उसने फिर भी जैसे कहा कि गुरु जी अब तो काफी थक चुका हूं, एक काम करता हूं फिर से किसी आदमी से पूछता हूं कि गांव कितनी दूर है !


गौतम बुद्ध ने कहा ठीक है पूछ लो ,पास से ही एक बूढ़ी औरत जा रही थी, शिष्य ने उस बूढ़ी औरत से पूछा, गांव कितनी दूर है ! तो उस औरत ने जवाब दिया बस पहुंच ही गए हैं ! 2 किलोमीटर और होंगे ! इस बात को सुनकर गौतम बुद्ध ने उस बूढ़ी औरत की तरफ देखा और मुस्कुरा दिए और वह बूढ़ी औरत भी गौतम बुध को देख कर मुस्कुरा दी ! 


शिष्य को कुछ अटपटा सा लगा की गुरुजी और वह बूढ़ी औरत दोनों क्यों मुस्कुराए इससे पहले भी जिस आदमी से पूछा था उसे भी देखकर गुरुजी मुस्कुरा दिए थे ! और उस आदमी ने भी गुरु जी को देखकर मुस्कुरा दिया था ऐसा क्यों ?


खैर फिर शिष्य ने सोचा की ओर 2 किलोमीटर बचे हैं चला जाए तो जल्दी ही पहुंच जाएंगे और उसने गुरु जी से कहा चलिए चलते हैं गुरु जी अब तो जल्दी ही पहुंच जाएंगे ! गुरुजी ने कहा कि चलो चलते हैं !


2 किलोमीटर चलने के बाद गांव नहीं आया तो शिष्य पूरी तरह से परेशान हो गया और उसने सामान वही पटक कर कहा, गुरु जी, अब मैं थक चुका हूं अब मुझ से चला नहीं जा रहा है ! और मैं अब किसी से पूछूंगा भी नहीं ! क्योंकि मैं जिस से भी पूछता हूं ,वह जो दूरी बताता है उसे सुनकर आप मुस्कुरा देते हैं और वह भी मुस्कुरा देता है पता नहीं क्या चल रहा है !


इस पर गुरु जी ने कहा कि देखो मुझे पहले से ही पता था कि गांव की दूरी 9 किलोमीटर है ! और अब तुम लगभग गांव के करीब पहुंच चुके हो यहां से थोड़ी दूर पर ही गांव है ! और रही बात उन लोगों को देखकर मेरे मुस्कुराने की तो वह मैं इसलिए मुस्कुरा रहा था !


क्योंकि ,वह लोग भी वही कर रहे थे जो मैं कर रहा हूं ! मेरा काम भी लोगों को उपदेश देना और सदैव आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना ही है और वह लोग भी तुम्हें कम दूरी बता कर तुम्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे थे !


क्योंकि मैं या वे लोग अगर तुम्हें पहले ही बता देते कि गांव 9 किलोमीटर है और बहुत दूर है और तुम चलकर नहीं जा पाओगे ,तो शायद आज तुम गांव के पास नहीं पहुंच पाते ! 2 किलोमीटर 2 किलोमीटर करके तुम 9 किलोमीटर तक का सफर पूरा कर चुके हो !



इसलिए हमेशा ऐसे लोगों की संगत करो जो तुम्हें काम करने के लिए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहें ना कि तुम्हें भय दिखाकर नकारात्मक बातें कर तुम को आगे बढ़ने से रोके


इस कहानी का तात्पर्य है कि सदैव ऐसे लोगों का संगत करें जो तुम्हें हमेशा मोटिवेट करें और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें ! क्योंकि इस जीवन में आगे बढ़ने के लिए "थकना मना है"



Amit kumar

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