मकर संक्रांति 2019
मकर संक्रांति 2019
Makar sankaranti 2019 का त्यौहार इस वर्ष 15 जनवरी को मनाया जा रहा है ! भारत में अलग अलग राज्यों में इस पर्व को अलग अलग तरीके से मनाया जाता है ! बहुत सारे जगहों पर आज के दिन पतंगबाजी की जाती है! और पतंग उड़ाने की परंपरा चली आ रही है !आज हम आपको एक ऐसी कथा बताने जा रहे हैं ,जिसमें श्री राम ने अपने भाइयों के संग मिलकर पतंग उड़ाई थी! इस संदर्भ में बालकांड में भी उल्लेख मिलता है!

राम एक दिन चंग उड़ाई!
इंद्रलोक में पहुंची जाई !!

पंपापुर से जब हनुमान जी का बुलावा आया था ,तब हनुमानजी बाल रूप में थे !जब हनुमान जी वहां आए तो वहां पर मकर संक्रांति का पर्व था ! उसी समय श्रीराम अपने भाइयों और मित्र मंडली के साथ पतंग उड़ाने लगे ! पौराणिक कथा के अनुसार वह पतंग उड़ते हुए देव लोक तक पहुंच गई !जब उस पतंग को भगवान इंद्र के पुत्र जयंत की पत्नी ने देखा वह बहुत ही आकर्षित हुई उस पतंग से और जयंत की पत्नी उस पतंग और पतंग उड़ाने वाले के प्रति सोचने लगी -

जासु चंद अस सुंदरताई!
सो पुरुष जग में अधिकाई !!

इस तरह का भाव जब उनके मन में आया तो उसने पतंग को पकड़ लिया ! और सोचने लगी कि पतंग उड़ाने वाला अपनी पतंग लेने के लिए जरूर आएगा और उसे सोच में वह पतंग उड़ाने वाले की प्रतीक्षा करने लगी ! जब पतंग को पकड़ लिए जाने के कारण भगवान राम को पतंग नजर नहीं आने लगी तब बालक श्री राम ने बाल हनुमान को पतंग का पता लगाने के लिए भेजा !

जब बाल हनुमान आकाश में उड़ते हुए इंद्रलोक पहुंचे तो वहां पर उन्होंने देखा कि एक स्त्री उस पतंग को अपने हाथ में पकड़े हुए हैं ! बाल हनुमान ने उस स्त्री से पतंग को मांगा !

इस पर उस स्त्री ने पूछा यह पतंग किसकी है
बाल हनुमान ने बाल श्री रामचंद्र जी का नाम बताया इस पर उसने श्री राम जी को देखने का इच्छा प्रकट किया !  बाल हनुमान यह सब सुनकर लौट आए और सारा बात श्री राम को बता दिया ! जय श्री राम जी ने यह सारी बातें सुनी तो हनुमानजी को वापस भेजा कि वह उन्हें चित्रकूट मैं अवश्य ही दर्शन देंगे ! हनुमान जी वापस लौट इंद्रलोक में जयंत की पत्नी को राम जी के द्वारा दिया गया उत्तर बता दिया! जिसको सुनकर जयंत की पत्नी ने पतंग को छोड़ दी-



Makar sankaranti 2019 के अवसर पर अमित कुमार ओर से आप सभी को हार्दिक बधाई दोस्तों अगर यह पुराणिक कथा आप सबों को अच्छा लगा हो तो आप कमेंट बॉक्स में कमेंट करें और फॉलो करना ना भूले धन्यवाद