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Monday, 24 December 2018

Merry Christmas पर जाने संता क्लॉज और प्रभु येशु के बारे में









ईश्वर स्वयंभू है । जिसका ना आदि है ना अंत है वह सर्वशक्तिमान सर्व परी सर्वश्रेष्ठ परमात्मा अलख निरंजन और शाश्वत है । वह दयावान है और वह क्षमावान करुणामई भी है। ईश्वर प्रेम का दूसरा नाम है। प्रेम के कारण ही ईश्वर ने मनुष्य की सृष्टि की इसलिए ईश्वर मनुष्य को अनंत प्रेम करता है ।वह अपनी दया दृष्टि हमेशा मनुष्य पर बनाए रखते हैं। क्रिसमस का मूल मर्म ही प्रेम है। प्रभु यीशु मसीह के आने का सर्वोच्च अभिप्राय अपने लोगों को उनके पापों से बचाना है इस क्रिसमस में याद करें कि परमेश्वर हमारे साथ हैं कठिन परिस्थिति में भी हम अकेले नहीं हैं ।परमपिता परमेश्वर हमारे साथ हैं। क्रिसमस के उत्सव से जुड़े सांता क्लॉज क्रिसमस ट्री चरणी की स्थापना उपहार देने और गरीबों के खिलाने जैसी कुछ सामाजिक प्रथाओं को समझना महत्वपूर्ण है।

सांता क्लॉस का वास्तविक नाम संत निकोलस था। जो चौथी शताब्दी के पूर्वार्ध में एशिया माइनर में मायरा के बिशप थे वह बड़े उदार और दयालु किस्म के थे ! वह गरीब लोगों की पिछड़ों की काफी मदद किया करते थे ।उनकी मृत्यु के बाद उनकी स्मृति में मायरा के ईसाइयों में बच्चों को सरप्राइस गिफ्ट देने की प्रथा शुरू की। कालांतर  में सांता क्लॉज़ की एक बड़ी किंबदंती बनी ।और उससे जुड़ी कई कहानियां भी प्रचलित हुई।
क्रिसमस ट्री हमें अदन  के बगीचे की स्थित जीवन के पेड़ और ज्ञान के पेड़ की याद दिलाता है। जीवन का पेड़ हमें ईश्वर और बहुतायत जीवन और आशीर्वाद की प्रचुरता का स्मरण कराता है।

प्रभु यीशु हमें लोगों से प्रेम करना सिखाते हैं ।इसलिए सभी लोग गिले-शिकवे भूलकर एक दूसरों के साथ प्रेम बांटे ।इस पर्व को किसी साधारण उत्सव की तरह नहीं बल्कि पूरी भक्ति के साथ मनाएं। क्रिसमस पर बालक येशु के मन की बात जानने की कोशिश करें।

ऐश्वर्या का प्रेम की गहराई का रहस्य स्थिति में निहित है कि उसने अपने इकलौते पुत्र को मनुष्य के पापों की क्षमा के लिए क्रूस पर मरने के लिए अर्पित कर दिया ! क्रूस का दंड अपमान और कुत्ता का प्रयाय था ! इसलिए यह दंड केवल  बड़े-बड़े अपराध के लिए दिया जाता था। ऐसे दुखों को झेलने के लिए ईश्वर ने अपने पुत्र को संसार के लिए अर्पित कर दिया ।जिससे मनुष्य को उनके पापों से मुक्ति मिले।

प्रभु येशु जन्मोत्सव का यह संदेश पूरी मानव जाति के लिए है ।केवल हमारे परमेश्वर सृष्टि करता ही नहीं परंतु हमारे प्रभु भी हैं। जो हमारी चिंता करते हैं हमारा पालन भी करते हैं ,परमेश्वर का प्रेम बाइबल के वचन में प्रकट होता है! जो हमें यूहन्ना 3 : 16 मैं मिलता है !परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम किया कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे वह नाश ना हो परंतु अनंत जीवन पाए !


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