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Tuesday, 8 May 2018

फले-फूले मीठा फल खाओ story



बाल कहानी
दोस्तों नमस्कार मैं अमित british4u में लेकर आया हूं !
बाल कहानी आज मैं जो कहानी बताने जा रहा हूं !
वह कहानी बच्चों के लिए प्रेरणा स्रोत हो सकती है !
दोस्तों ज्यादा समय ना लेते हुए मैं कहानी प्रारंभ करता हूं !


बहुत समय पहले की बात है किसी गांव में दो बच्चे थे !
बच्चों की उम्र यही कोई  8 से 9 साल की रही होगी !
दोनों ही बच्चे आपस में बहुत ही अच्छे दोस्त हैं ! दोनों साथ खेलते थे स्कूल जाते थे
और दोनों साथ ही बहुत मस्त मजा भी किया करते थे ! हालांकि दोनों बच्चे पढ़ने में
बहुत ही अच्छे थे उसमें से एक थोड़ा स्वार्थी टाइप का था ! जो बच्चा स्वार्थी टाइप का
था उसका नाम श्याम था ! और दूसरे वाले का नाम था ! एक दिन दोनों बच्चा खेलते खेलते
जंगल की ओर निकल गए ! और खेलते-खेलते उनको समय का पता ही ना चला और
शाम हो गई ! क्योंकि जंगल बहुत घना था ,इसलिए दोनों बच्चों को थोड़ा डर भी लगने
लगा इतने में कहीं से एक बूढ़ी औरत दोनों बच्चे के पास  आई और उस बूढ़ी औरत के
पास एक लकड़ी का गट्ठर था !बुदी ने लड़खड़ाते हुए आवाज में दोनों बच्चों से कहा कि
बच्चों यहां से कुछ ही दूरी पर मेरी कुटिया है, मैं बुधी हूं ,लकड़ी का गट्ठर वहां तक नहीं ले
जा पाऊंगी ,अगर तुम दोनों मेरी मदद कर दो लकड़ी के गट्ठर को कुटिया तक पहुंचाने में !
तो मैं तुम दोनों की शुक्रगुजार रहूंगी ! बूढ़ी औरत ने कहा बेटा अगर यह लकड़ी का गट्ठर
कुटिया तक नहीं पहुंचा तो मैं आज खाना नहीं बना पाऊंगी !और भूखी रह जाऊंगी दोनों
बच्चों ने बूढ़ी औरत की बात को बड़े ही ध्यान से सुनो राम ने बूढ़ी औरत को जवाब दिया हां
हां माई  हम आपको आपके कुटिया तक जरूर छोड़ आएंगे ,लेकिन श्याम ने कहा कि नहीं
नहीं, मैं छोड़ने नहीं जा सकता शाम हो गई है और मुझे घर भी जाना है ! तो राम ने श्याम को
कहा , 2 मिनट की तो बात है पास ही में तो है छोड़ देते हैं ! फिर हम घर चले जाएंगे !श्याम ने
कहा ,नहीं यार मैं किसी लाचार बुढ़िया की गठरी उठाऊंगा मुझसे नहीं होगा तुम्हें जाना है तो जाओ !
राम ने कहा ,ठीक है मैं ही छोड़ आता हूं इतना कह कर राम  बूढ़ी औरत की गठरी को लेकर
उसकी झोपड़ी तक छोड़ने चला गया ! जब राम बूढ़ी औरत को छोड़ कर लौट रहा था ,बूढ़ी औरत
ने कहा कि बेटा तुमने मेरी मदद की है ! मैं तुम्हें कुछ उपहार देना चाहती हूं ! झोपड़ी के अंदर एक
छोटी सी डिब्बी रखी हुई है ,उसे लेकर आओ ! राम ने डिब्बी लाकर बूढ़ी औरत को दे दिया डिब्बे में
से एक बीज निकालकर बूढ़ी औरत ने राम को दिया और कहा कि यह बीज अपने घर के आंगन में लगा
देना मीठे फल होंगे ! और उसके सर पर हाथ रख कर आशीर्वाद देते हुए बोली " फले-फूले मीठा फल खाओ "राम उस बीज को लेकर घर लौट आया !और उस बीज को अपने आंगन में लगा दिया ,काफी दिन बाद
 बीज वृक्ष का रूप लेकर मीठे फल देने लगा ! श्याम भी राम के घर जब भी जाता ,तो उस फल को खाता
काफी मीठे लगते ! श्याम ने राम से कहा ,यार यह तो मीठा फल है इसका पेड़ तुम कहां से लाए !
राम ने जवाब दिया ,कि उस दिन बूढ़ी माता की मदद की थी ना तो उसी ने एक बीज दिया था !
उसी से यह फल हुआ है ! श्याम ने कहा ,यार चलो ना बूढ़ी माता से एक और बीज लेता हूं !
मैं भी अपने घर के आंगन में लगाऊंगा ! राम ने कहा ,चलो ठीक है और दोनों जंगल की ओर चले गए !
जंगल की ओर जाते जाते बूढ़ी औरत नहीं मिली ! और वह दोनों घर लौट आए !अगली सुबह फिर से जंगल
की ओर चल दिए !औरत मिल गई ,आज भी बूढ़ी औरत के पास लकड़ी का गट्ठर ही था ! श्याम ने तपाक
से कहा ,माता जी मैं आपकी  लकड़ी की गठरी आपके झोपड़ी तक पहुंचाने में में आपकी मदद करूंगा !
बूढी कहा ठीक है कर दो ! श्याम ने उसके घर तक छोड़ दिया ! बूढ़ी माता ने कहा धन्यवाद
बेटा जाओ ! अब अपने घर जाओ ! श्याम ने तपाक से कहा ,माताजी राम को अपने मदद के बदले
एक बीज दिया था ! मुझे भी दो ना ! मैंने भी तो आपकी मदद किया है ! बूढी ने कहा ठीक है देती हूं !
जाओ एक डिब्बी झोपड़ी के अंदर है लेकर आओ ! श्याम डिब्बी को लेकर आया, उसमें से बीज निकालकर
बूढ़ी माता ने श्याम को दिया और कहा "फले-फूले कच्चा फल खाओ"श्याम खुश होकर अपने घर की ओर लौट गया ! और अपने आंगन में वह बीज लगा दिया !
बीज से पेड़ बने और फल भी निकला पर फल खाने में काफी खट्टा और कड़वा था ! श्याम को
बहुत गुस्सा आया श्याम ने राम से कहा यार तेरा फल मीठा है और  मेरा फल खट्टा हो गया ,लगता है
बूढ़ी माता ने मुझे ठगा है ! चलो उनसे मिलते हैं !राम ने कहा चलो ठीक है फिर दोनों जंगल की ओर
चल पड़े बूढ़ी माता मिली तो श्याम ने कहा माताजी मुझे आपने खट्टा फल दिया और राम को मीठा फल
ऐसा क्यों ! बूढ़ी माता ने दोनों बच्चों को समझाते हुए कहा कि बच्चों इंसान जैसा कर्म करता है ,उसको
फल भी वैसा ही मिलता है ! राम ने निस्वार्थ भाव से मेरी मदद की थी ! तो उसका फल भी उसे मीठा मिला
पर श्याम तुमने मेरी मदद अपने स्वार्थ के लिए किया था ! इसलिए तुम्हारा फल खट्टा निकला ! आगे से कभी
भी किसी की मदद करो तो निस्वार्थ भाव से करो तभी उसका परिणाम तुमको अच्छा मिलेगा !

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